पर्यावरण प्रबंधन

है पृथ्वी का देखभार हमसे

 

डीवीसी का यह दृढ़ विश्वास है कि पर्यावरण के क्षेत्रों में उत्कृष्टता एक परम महत्वपूर्ण कार्य है । डीवीसी एक सुसंगत एवं नियमबद्ध पद्धति में पर्यावरणिक विषयों के साथ काम करने के लिए प्रयत्नशील है। डीवीसी का पर्यावरणिक प्रबंधन कार्यक्रम निम्नलिखित मुख्य क्रियाकलापों से निर्मित है ।

  • स्टैक उत्सर्जन, बहि:स्राव व परिवेशी वायु गुणवत्ता आदि के संबंध में ताप विद्युत केन्द्रों के पर्यावरणिक प्राचलों का प्रबोधन व अनुपालन ।
  • तापीय इकाइयों से निकली ठोस अपशिष्ट यथा राख आधारित उद्योगों (सीमेंट, ईंट, ब्लॉक आदि) में उड़न राख का उपयोग व परित्यक्त खुले खदानों व नीचले क्षेत्रों का पुनर्सुधार प्रबंधन ।
  • ताप विद्युत केन्द्रों में और उसके चतुर्दिक हरित क्षेत्र, वनीकरण, भू-दृश्य व सौन्दर्यीकरण कार्य का सृजन व अनुरक्षण ।
  • भूमि गुणवत्ता को पुनर्स्थापित व संरक्षित करने के क्रम में मृदा अपरदन व भू-क्षरण का सामना करना ।
  • सीमेंट, ईंट व अन्य राख आधारित उत्पादनों के मूल्य वर्धित उपयोग हेतु निर्माताओं, स्थानीय उद्यमियों व अन्य के अंदर जागरुकता एवं उत्साह सृजन ।

डीवीसी अपने ताप विद्युत संयंत्रों में पर्यावरणिक संस्थापन योग्य विद्युत उत्पादन उपायों को अपनाता है तथा पर्यावरण व वन मंत्रालय (एमओईएफ), केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) आदि के निर्देशों व शर्तों का अनुपालन करता है । बोकारो, चंद्रपुरा व दुर्गापुर अवस्थित डीवीसी की पुरानी इकाइयों, जिनकी स्थापना प्रदूषण नियंत्रण मापों के पहले हुई थी, में इस संबंधी मानकों का सख्ती से पालन किया जा रहा है । डीवीसी की पुरानी इकाइयों के अलावा नयी शुरू की गयी इकाइयों यथा केटीपीएस, कोडरमा, डीएसटीपीएस, अंडाल, एमटीपीएस, मेजिया, सीटीपीएस, चंद्रपुरा में प्रदूषण से निजात पाने के लिए डीवीसी द्वारा आवश्यक कदम उठाये गये हैं । डीवीसी द्वारा अपनी तापीय संयंत्रों में निम्नलिखित बड़े कदम उठाये गये हैं :

  • अनुमेय सीमा के अंदर उत्सर्जन को कम करने के लिए पुरानी इकाइयों में ईएसपी के अतिरिक्त क्षेत्रों का रिट्रोफीटिंग/नयी इकाइयों में उच्च क्षमता संपन्न ईएसपी की स्थापना ।
  • भूमि व जल संरक्षण के लिए बहि­:स्राव के पुनर्चक्रण व राख जल पुनरुद्धार प्रणाली से राख जल का उपयोग ।
  • राख कुंडों से राख निष्कासन तथा उसके बाद पूर्णतः यंत्रीकृत इस्पात आच्छादित डम्परों, माननीय उच्चतम भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार भारत में पहली बार, द्वारा उसे खुले कोयला खदानों में डालना । परित्यक्त खदानों को भरने के बाद, ऊपरी सतह को वृक्षारोपण योग्य बनाने के लिए उसके मिट्टी से ढक दिया जाता है ।
  • आधुनिक तोल-सेतुओं पर पुराने वोल्यूमेट्रिक (कम) से हकट कर वेहमेन्ट आधार (एमटी) पर कुंड राख परिमाण की मापन पद्धति का प्रथम बार प्रवर्तन ।