आंतसंरचनात्मक विकास

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आंतसंरचनात्मक विकास कार्य ग्रामीणों द्वारा चयनित व प्राथिमकताकृत अनिवार्य आवश्यकता आधारित गतिविधियाँ हैं :

  • पेयजल

सतही एवं भूतल जल व्यवहार करते हुए नल बिन्दुओं, ट्यूबवेल तथा कुओं के माध्यम प्रावधानित सुरक्षित पेयजल सुविधाएँ ।

  • संचार

ग्रामीण संचार प्रणाली सड़कों (डब्ल्यूबीएम/बिटूमिनस/पीसीसी), पुलिया, निकास प्रणाली, यात्री आश्रय स्थल आदि के माध्यम संवर्धित किया जाता है ।

  • शिक्षा व स्वास्थ्य देख-रेख

सरकारी शिक्षा आंतसंरचना चहारदीवारी, रसोई छत, समुदाय भवनों, प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रों तथा चिकित्सा निदानालय भवनों द्वारा संपूरित किया जाता है।

  • सिंचाई सुविधाएँ

ग्रामीणों को उनकी भूमि की फसल क्षमता बढ़ाने के लिए निम्नलिखित सिंचाई आंतसंरचनाएँ प्रावधानित की जाती हैं ।

छोटी नदियों तथा जल स्रोतों से लघु उद्वह सिंचाई

रोक बांध और तालाब

सिंचाई कुओं

वर्षा जल उपयोग संरचनाएँ

लघु जल विकास आदि

  • गांव एवं स्कूल स्वच्छता

गांवों और स्कूलों की स्वास्थ्य स्वच्छता पर विशेष बल दिया गया है । प्रमुख परियोजनाओं के 10 किमी परिधि के अंदर स्कूलों को स्वच्छता एवं पेयजल सुविधा, जहाँ आवश्यक हो प्रदान करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं । विद्यालयों में बालक और बालिकाओं के लिए शौचालय अलग-अलग बनाये जाते हैं । नल बिन्दुओं का निर्माण कर तथा पास के जल स्रोतों से पेय जल प्रावधानिकत किया जाता है । खुले प्रदूषण से इन गाँवों को मुक्त रखने के उद्देश्य से ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता से गांवों में व्यक्ति सह गृह शौचालय बनाये जा रहे हैं । इसके अलावा, धुलाई, स्नानघाटों तथा श्मशान घाटों का निर्माण कर ग्रामीण स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है ।