नागरिक चार्टर

संक्षिप्‍त रूपरेखा :

 

7 जुलाई, 1948    भारत की  प्रथम बहूद्देशीय नदी घाटी परियोजना – दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) केन्द्रीय विधान मंडल के एक अधिनियम द्वारा अस्तित्व में आया। डीवीसी का प्रादुर्भाव पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों में फैले दामोदर नदी घाटी में निवास कर रहे जन समुदाय को प्रतिवर्ष दुर्दांत व उच्छृंखल दामोदर नदी के बाढ़ से होनेवाले भयंकर नुकसान से बचाने के लिए इसे नियंत्रित करने बाबत हुआ। तबसे, डीवीसी, दामोदर घाटी क्षेत्र को विकसित करने के अपने प्रयास में तत्पर रहा साथ ही इस प्रक्रिया में उसने कई प्रथम कीर्तिमान स्थापित किये ।

 

प्रथम

  • भारत सरकार द्वारा अपनायी गयी प्रथम बहूद्देशीय नदी घाटी परियोजना।
  • तीन स्रोतों – कोयला, जल और तरल ईंधन के माध्यम विद्युत उत्पादन करने वाला सिर्फ भारत सरकार का केवल एक मात्र पहला संगठन।
  • मैथन में स्थापित भारत का प्रथम भूतल पनबिजली केन्द्र।
  • प्रथम बीटीपीएस बॉयलरों के माध्यम पल्वराइज्ड ईंधन फर्निशों में अनटैप्ड निम्न स्तरीय कोयले को जलाने में।
  • चंद्रपुरा ताप विद्युत केन्द्र में हाई स्टीम पैरामीटर का व्यवहार करते हुए भारत में प्रथम री-हीटिंग इकाई।

पूर्वी भारत में परिवर्तित प्रथम, मेजिया ताप विद्युत केन्द्र के बॉयलर में तेल खपत कम करने के लिए पल्वराइज्ड कोयला (डीआईपीसी) प्रणाली का डायरेक्ट इग्निशन।

वर्ष एक दृष्टि में

एक उभरता कार्यप्रदर्शन ग्राफ

  • सकल ऊर्जा उत्पादन में 29% की वृद्धि (27788 एमयू)
  • ताप विद्युत उत्पादन में 25% की वृद्धि (27558 एमयू)
  • पन विद्युत उत्पादन में 18% की वृद्धि (230.3 एमयू)
  • वार्षिक संयंत्र उपलबधता गुणक (पीएएफ) में 94% की वृद्धि (74.7%)
  • वार्षिक विशिष्ट तेल खपत में 26% की वृद्धि (1.32 एमएल/किवाघं)
  • वार्षिक सहायक विद्युत खपत में 30% की वृद्धि (9.10%)
  • वार्षिक ऊष्मा दर में 60% की वृद्धि (2476 केकैल/किवाघं)

 

2013-14 के दौरान विद्युत उत्पादन में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि थी – 18.07.2013 से प्रभावी कोडरमा ताविके ई#1 (500 मेवा) का वाणिज्यिक प्रचालन।

 

वित्त

2012-13 के दौरान 10,604 करोड़ रुपये के प्रति 2013-14 में विद्युत की बिक्री से डीवीसी ने 11672 करोड़ रुपये के सकल व्यापार का रिकार्ड स्थापित किया जो 10.07% की वृद्धि दर्शाता है। तथापि, विद्युत उद्देश्य पर प्रचालन घाटा विगत वर्ष के 389 करोड़ रुपये के अधिशेष के प्रति 1071 करोड़ रुपये है। सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण के मद में 76 करोड़ रुपये के लाभ को समंजन करने के बाद 2013-14 में निगम को रु.995 करोड़ का निवल घाटा सहना पड़ा।

 

विद्युत उत्पादन एवं  क्षमता संवर्धन कार्यक्रम

डीवीसी ने 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) में 6750 मेवा के बृहद्  क्षमता संवर्धन कार्यक्रम अपनाया था जिसमें 10वीं योजना की 1000 मेवा के बचे हुए परियोजना कार्य शामिल थे। अब तक कोडरमा ताविके (इकाई-2) के शुरू होने में विलंब के कारण, डीवीसी ने 500 मेवा शुरू करने में उपलब्धि पायी है। 11वीं योजना की बची परियोजनाओं व इकाइयों को ध्यान में रखते हुए 12वीं योजना हेतु लक्षित कुल क्षमता संवर्धन कार्यक्रम 3520 मेवा पर रखा गया है। 12वीं योजना के दौरान, डीवीसी ने रघुनाथपुर ताप विद्युत केन्द्र (चरण-II) विस्तार कार्यक्रम में 2X660 मेवा इकाई की स्थापना के माध्यम से घाटी क्षेत्र में प्रथम सुपर क्रिटिकल इकाइयों को शुरू करने का निर्णय लिया है तथा कोडरमा ताप विद्युत केन्द्र में 2X800 मेवा की सुपर क्रिटिकल इकाइयों की स्थापना पर भी विचार कर रहा है। डीवीसी वर्ल्ड बैंक की सहायता से फोटोवोल्टेइक सौर विद्युत संयंत्रों की स्थापना कर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। आरई 2013-14 हेतु योजना परिव्यय 3515.97 करोड़ रुपये और बीई 2014-15 हेतु 3964.99 करोड़ रुपये आबंटित था।

 

विद्युत का पारेषण वितरण तथा पारेषण नेटवर्क का संवर्धन

 

डीवीसी के  पास विविध वोल्टेज स्तरों पर उत्पादित विद्युत के पारेषण व वितरण हेतु 33 किवो लाइनों के 1321 सर्किट किलो मीटर तथा 10 अदद 33 किवो ग्राही केन्द्रों समेत 38 अदद ईएचवी उपकेन्द्र, ईएचवी उपकेन्द्र, ईएचवी  लाइनों के 5834 सर्किट किलो मीटर (सीकेएम) को मिलाकर एक  पारेषण व वितरण (टीएण्डडी) नेटवर्क है ।

 

डीवीसी ने रिमोट मीटरिंग के माध्यम से सही बिलिंग चक्रण प्राप्त करने के लिए प्रणाली ऊर्जा उपाय लेखा व लेखा-परीक्षा (एसईएमएए) प्रणाली का क्रियान्वयन कार्य भी शुरू किया है जिससे कैश फ्लो चक्रण में सुधार तथा बेहतर राजस्व प्रबंधन परिलक्षित हुआ है।

 

वर्ष 2013-14 के दौरान, औद्योगिक विद्युत आपूर्ति संयोजन का कार्य डीवीसी के घाटी क्षेत्र में फैले विभिन्न 33 किवो टेक-ऑफ बिन्दुओं से 65.9 एमवीए की कुल ठेका माँग हेतु 15 अदद नये उपभोक्ताओं के साथ शुरू किया गया है।

 

अधिशेष विद्युत का निर्यात

 

घाटी माँग को पूरा करने के बाद, डीवीसी मध्यप्रदेश, दिल्ली के डिस्कॉम, हरियाणा, पंजाब आदि में अवस्थित विभिन्न लाभभोगियों को विद्युत की आपूर्ति कर रहा है। डीवीसी झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जेयूवीएनएल) पूर्व के जेएसईबी को 100 मेवा आरटीसी विद्युत की अनुसूची आपूर्ति भी निरंतर रूप से कर रहा है। उपर्युक्त के अलावा, डीवीसी ने कर्नाटक को 450 मेवा की आपूर्ति हेतु एक विद्युत क्रय करार  (पीपीए) भी निष्पादित किया है।

 

कोल खदान कार्यकलाप

डीवीसी ने पश्चिम बंगाल में बरजोरा (उत्तर) और खगरा-जयदेव कोयला ब्लॉक के पूर्व-खदान तथा खदान क्रियाकलापों को शुरू करने के लिए इस्टर्न मिनिरल एण्ड ट्रेडिंग एजेंसी (एम्टा) के साथ एक संयुक्त उद्यम कंपनी की स्थापना की थी। 2013-14 में, बरजोरा (उत्तर) से कोयला उत्पादन लगभग 15,19,345 एमटी प्राप्त हुआ। डीवीसी ने झारखंड में सहारपुर-जमारपानी कोयला ब्लॉक हेतु भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट की तैयारी तथा अन्वेषण क्रियाकलाप चलाने के लिए मेसर्स सिंगारेनी कोलियरिज कंपनी लिमिटेड (आंध्रप्रदेश सरकार व भारत सरकार का एक संयुक्त उद्यम) की नियुक्ति की है।

 

वर्ष 2013-14 में कोयला खनन के क्षेत्र में, डीवीसी बेरमो खदान ने 53,748 एमटी कोयला उत्पादन किया है।

 

बाढ़ नियंत्रण और जल संसाधन प्रबंधन :

 

भयंकर चक्रवात “फाइलिन” के प्रभाव के कारण तेनुघाट बाँध से उच्च बाढ़ जल निकास से, डीवीसी को 3,90,875 एकड़ फीट के वास्तविक अंतर्वाह के  प्रति 14.10.2013 को  छह (6) घंटे यथा 16.00 घंटे से 22.00 घंटे तक की एक अवधि हेतु 2,30,000 एकड़ फीट (पंचेत से 1,60,000 एकड़ फीट एवं मैथन से 70,000 एकड़ फीट) सिर्फ के अनुरूप मैथन व पंचेत जलागारों से बाढ़ जल निकास के लिए बाध्य होना पड़ा था।

 

सिंचाई, म्यूनिसिपल तथा उद्योग संबंधी जल की सभी वचनबद्ध माँगों की आपूर्ति पूर्णतः अपने जलागारों से की गयी थी। जल संसाधन प्रबंधन में कुछ नये विकासात्मक क्रियाकलाप शुरू किये गये हैं जो इस प्रकार है :

 

  • दामोदर बराकर में जलागारों के एकीकृत नियंत्रण हेतु गाइड कर्वों का निर्माण।
  • सुरक्षा विवेचना हेतु डीवीसी द्वारा एक बाँध सुरक्षा विवेचना पैनेल (डीएसआरपी) का गठन किया गया है।
  • कोनार बाँध को वर्ल्ड बैंक निधियन की सहायता से बाँध पुनर्वासन एवं सुधार कार्यक्रम (डीआरआईपी), केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्लयूसी), भारत सरकार के अधीन अपनाये जाने का प्रस्ताव किया गया है।
  • झारखंड राज्य में पड़ने वाले दामोदर घाटी क्षेत्र में नदी बराकर पर बाल पहाड़ी बाँध के निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सीडब्ल्यूसी के माध्यम डीवीसी द्वारा तैयार की गयी है।

 

भूसंरक्षण

 

वायु प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभाव के प्रति माइक्रो जलवायु दशा के बचाव बाबत बेहतर वातावरण तथा पर्यावरणिक प्रणाली अनुरक्षित करने के लिए पश्चिम बंगाल व झारखंड में इसकी विभिन्न विद्युत परियोजनाओं में चतुर्दिक पर्यावरणिक कार्यों को पूरे वर्ष चालू रखा गया था। डीवीसी ने भी पौधकरण, बगीचों, जड़ी-बूटी संबंधी पौधों, वृक्ष विधि आदि जैसे विभिन्न हरित परियोजनाओं के विकास के माध्यम से पर्यावरणिक प्रदूषण को कम करने के अपने उपाय भी जारी रखे।

 

घाटी में मत्स्य पालन

 

डीवीसी में पूर्ण भंडारण स्तर पर लगभग 34,447 हेक्टेयर के एक संयुक्त जल संवर्धित क्षेत्र तथा लगभग 20,116 हेक्टेयर के कुल उत्पाद जल क्षेत्र सहित दामोदर घाटी क्षेत्र में इसके नियंत्रणाधीन चार प्रमुख जलागार (मैथन, पंचेत, तिलैया व कोनार) हैं। अब, 1335 सदस्यों को समेकित करते हुए कुल 35 पंजीकृत मछुआरा को-ऑपरेटिव सोसाइटी हैं । वर्ष 2013-14 में, लगभग 41.5 लाख मत्स्य अंगुलिकाएँ मैथन फिश फार्म में उत्पादित की गयीं और मैथन जलागार में छोड़ी गयी थीं। लगभग 6 लाख मत्स्य अंगुलिकाएँ मेजिया ताप विद्युत केन्द्र (एमटीपीएस) में उत्पादित की गयी थीं। मछुआरा प्रशिक्षण कार्यक्रम पश्चिम बंगाल व झारखंड सरकारों के मत्स्य विभाग के साथ-साथ सेंट्रल इनलैण्ड फिशरिज रिसर्च इंस्टिच्‍यूट (सीआईएफआरआई), बैरकपुर के सहयोग से नियमित रूप से संचालित किये जाते हैं। वर्ष 2013-14 के दौरान, कुल 491 मछुआरों ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया है।

 

पर्यावरण : धारणीयता निवेश

भारत में पहली बार, पर्यावरण  को  सुरक्षित रखने के  लिए पूर्ण  प्रामाणिक  पद्धति के रूप में  दिशा स्थल पर  कुंड  से राख की

 

ढ़ुलाई हेतु  मैकेनाइज्ड स्टील  कवर्ड  कंटेनर डम्परों/ट्रकों का व्यवहार किया जा रहा है। साथ ही, प्रथम बार आधुनिक वेब्रिजों के माध्यम से कुंड राख परिमाण की मापन पद्धति, राख प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए अपनायी गयी है। डीवीसी की नयी इकाइयों में शुष्क उड़न राख संग्रहण प्रणाली विद्यमान है तथा पुरानी इकाइयों में शुष्क उड़न राख संग्रहण प्रणाली स्थापित करने के लिए कार्रवाई की गयी है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में डीवीसी की सभी इकाइयों हेतु कुल उड़न राख उपयोग 70.3% के अनुरूप है जिसमें राख उपयोग का कुल परिमाण 90 लाख एमटी के कुल उत्पादित राख परिमाण के प्रति 63.30 लाख एमटी है।

 

वनीकरण कार्यक्रम

 

डीवीसी ने पश्चिम बंगाल राज्य में मेजिया ताविके व रघुनाथपुर ताविके तथा झारखंड राज्य में चंद्रपुरा ताविके, बोकारो ताविके तथा हजारीबाग के नजदीक निम्न वन भूमि पर वनीकरण का कार्य क्रियान्वित किया है। सांविधिक आवश्यकता के अनुसार डीवीसी की नयी परियोजनाओं यथा दुर्गापुर स्टील थर्मल पावर स्टेशन (डीएसटीपीएस), अंडाल तथा रघुनाथपुर ताप विद्युत केन्द्र (आरटीपीएस), रघुनाथपुर एवं कोडरमा ताप विद्युत केन्द्र (केटीपीएस), कोडरमा  हेतु हरित क्षेत्र विकास कार्यक्रम डीवीसी ने पहले ही शुरू कर दिया है।

 

सामाजिक एकीकरण कार्यक्रम (एसआईपी)

 

डीवीसी ने 1981 में अपना सामाजिक एकीकरण कार्यक्रम (एसआईपी) शुरू किया। एसआईपी मूलतः डीवीसी की एक ऐसी संकल्पना है जो यह अपनी परियोजनाओं के 10 किमी की परिधि के अंदर निवास कर रहे समुदायों के सामाजिक-आर्थिक तथा आंतसंरचनात्मक विकास की वचनबद्धता को निरूपित करता है। कार्यक्रम जो सिर्फ 25 गाँवों से शुरू हुआ था, अब वह 629 गाँवों में फैल चुका  है (पश्चिम बंगाल में 297 तथा झारखंड में 332)।

 

वर्ष 2013-14 में एसआईपी क्रियाकलापों हेतु 2356.39 लाख रुपये आबंटित किये गये थे ।

 

सफलता की कहानी

 

गब्बर मरांडी को जीवनदान

गब्बर मरांडी, धनबाद जिले के निरसा ब्लॉक के अंतर्गत अमकुरा का एक ग्रामीण जो एक गंभीर स्थिति में सड़क पर गिरा पाया गया  जिसके पैरों में गैंगरिंग हो गया था। डीवीसी (एसआईपी स्कंध) के अधिकारियों ने तत्काल उसे मैथन अस्पताल पहुँचाया और डीवीसी के चिकित्सकों ने उपचार किया। जिसके परिणामस्वरूप, श्री मरांडी  पैरों के विच्छेदन से बच गये और क्रमशः ठीक हो गये। उसने अपनी जीवन रक्षा के लिए डीवीसी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

केसोरिया गाँव की घटना

निरसा ब्लॉक के केसोरिया गाँव में विषाक्त भोजन के कारण 80 ग्रामीण बीमार हो गये। निरसा ब्लॉक प्रशासन के अनुरोध पर तत्काल कार्रवाई के फलस्वरूप, डीवीसी के एसआईपी स्कंध के अधिकारियों ने मैथन अस्पताल की मदद से बीमार व्यक्तियों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा प्रदान की।


स्वास्थ्य संबंधी देखरेख

झारखंड और पश्चिम बंगाल के राज्यों में अवस्थित विभिन्न गाँवों में एक नियमित अंतराल पर मलेरिया, डायरिया, जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य देख-रेख, प्रतिरक्षण, कैंसर, टीबी आदि पर 94 स्वास्थ्य जागरुकता शिविर लगाये गये थे तथा 18,523 ग्रामीण लाभांवित हुए थे। डीवीसी चिकित्सकों की सहायता से स्कंध ने चिकित्सा चल इकाइयों के माध्यम से ग्रामीणों के द्वार-द्वार चिकित्सा सुविधा प्रावधानित की थी। वर्ष 2013-14 के दौरान चल चिकित्सा इकाइयों के माध्यम 1,26,945 ग्रामीण उपचारित किये गये थे तथा 34,244 रोगी हमारे संस्थापित होमियो डिस्पेंसरियों के माध्यम उपचारित किये गये थे।

 

शैक्षिक विकास

 

वर्ष के दौरान निम्नलिखित उद्देश्यों सहित हमारा प्रयास गाँवों में विद्यमान शिक्षा आंतसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा चलाये जा रहे प्राथमिक विद्यालयों को उन्नत बनाना था :

  • सरकारी विद्यालयों को फर्नीचर तथा अन्य आंतसंरचनात्मक सुविधा प्रदान करना।
  • अंतर-विद्यालय खेल-कूद, खेलकूद समारोह, सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन।
  • विद्यमान भवनों में स्कूल कक्षाओं के निर्माण व नवीकरण के द्वारा स्कूल आंतसंरचना का सुदृढ़ीकरण।
  • चहारदीवारी का निर्माण, हैंड पंप, शौचालय आदि की स्थापना।
  • छात्रों को स्वास्थ्य जाँच/जागरुकता शिविरों के द्वारा जागरूक बनाना।

वर्तमान में, विभिन्न परियोजनाओं में 21 शिशु शिक्षा केन्द्र (एसएसके) तथा अनौपचारिक शिक्षा केन्द्र (एनएफई केन्द्र) चल रहे हैं। हमारे सभी एसएसके तथा एनएफई केन्द्रों में निःशुल्क पठन व लेखन सामग्री प्रावधानित की जाती हैं।

शुरू से ही, डीवीसी ने शिक्षा प्रदान कर अपनी प्रमुख परियोजनाओं के आस-पास अवस्थित ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु अपनी वचनबद्धता के प्रति उपाय बतौर विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में प्रचालन और निधियन के कार्य की शुरुआत की है। वर्तमान में डीवीसी घाटी क्षेत्र में उपलब्ध है :

क)  डीवीसी के निजी विद्यालय – 16

ख)  डीवीसी द्वारा पूर्णतः निधियित – मैथन, बीटीपीएस, सीटीपीएस प्रत्येक में एक-एक 03 केन्द्रीय विद्यालय तथा एमटीपीएस में 01 डीएवी पब्ल्कि स्कूल।

ग)  आंत संरचनात्मक साहाय्य – डीवीसी कॉलोनी/टाउनशिप में 11 सरकारी/निजी विद्यालय। उक्त 31 विद्यालयों में 23,480 छात्र हैं। उक्त विद्यालय में पढ़नेवाले गैर डीवीसी कर्मचारियों के बच्चों की प्रतिशतता लगभग 82% है।

 

कृषिगत तथा गैर कृषिगत क्रियाकलापों का विकास


किसानों को आधुनिक कृषिगत पद्धतियों के बारे में जानकारी प्रदान कर भू-फसल को बढ़ाने के उपाय किये जा रहे थे। सब मिलाकर, 924 ग्रामीणों ने कृषि में आधुनिक पद्धतियों पर विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया है।

 

अन्य सामाजिक पहल

ग्रामीणों में पर्यावरण सुरक्षा तथा जागरुकता पैदा करने के लिए, एसआईपी स्कंध ने अपने सामाजिक वनीकरण कार्यक्रम के माध्यम वन महोत्सव तथा वनीकरण कार्यक्रम आयोजित किये जिसमें ग्रामीणों को फलदार वृक्ष तथा टिम्बर जाति के पौधे वितरित किये गये थे। ईंधन  वन संग्रहण की मांग को कम करने के उद्देश्य से, डीवीसी ने ग्रामीणों को ईंधन -वन-प्रजातियाँ भी वितरित की गयीं। विद्यालय और अन्य जन क्षेत्रों में पौधकरण का कार्य किया गया था। विभिन्न कार्यकलापों यथा; सिलाई, ऊन कताई पर कुशलता विकसित प्रशिक्षण वर्ष भर स्व-सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों की जीविका हेतु आयोजित किये जा रहे थे। लगभग 1428 ग्रामीणों ने हमारे स्थापित प्रशिक्षण केन्द्र तथा बाहर अवस्थित विशिष्ट प्रशिक्षण केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष के दौरान विभिन्न आंत संरचना विकासों पर 1147.39 लाख रुपये खर्च किये गये थे ।

 

ग्रामीण विद्युतीकरण

“राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना” के अधीन, डीवीसी को सभी ग्रामीण गृहों में विद्युत प्रावधानित कर संबंधित राज्य सरकारों की ओर से ग्रामीण विद्युतीकरण कार्य के निष्पादन व क्रियान्वयन का कार्य सौंपा गया है। पश्चिम बंगाल में पूर्व मिदनापुर की ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजना पूरी हो चुकी है। झारखण्ड में धनबाद, कोडरमा व बोकारो जिले में ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजना भी पूरी हो चुकी है। अन्य सभी परियोजनाएँ पूरे होने के अग्रिम चरण पर है।

झारखंड सरकार (जीओजे) ने आरजीजीवीवाई की डीडीजी योजना के अधीन अ-पहुँच ग्रामों के विद्युतीकरण के लिए डीवीसी को क्रियान्वयन अभिकर्ता के रूप में नामित किया है।

 

सूचना प्रौद्योगिकी

कार्यस्थलों पर बायोमेट्रिक आधारित उपस्थिति प्रणाली तथा आगंतुक प्रबंधन प्रणाली का प्रर्वतन प्रक्रियाधीन है। युक्ति युक्त बिन्दुओं पर स्वचलित वर्षा मापी यंत्र स्थापित कर बाढ़ पूर्वानुमान हेतु आईटी प्रणाली विकसित की गयी है। पेरोल तथा पेंशन स्टेटमेंट इंटरप्राइज बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (ईबीए) के माध्यम सफलतापूर्वक तैयार किया जा रहा है। वर्धित विशेषताओं से संपन्न नयी ई-बिलिंग प्रणाली का विकास भी प्रवर्तित किया गया है।

 

राजभाषा कार्यक्रम


वर्ष 2013-14 के दौरान, डीवीसी में निगम के कार्यालयीन कार्य में हिन्दी के प्रगामी प्रयोग हेतु विभिन्न राजभाषा कार्यक्रम कार्यान्वित किये गये।

  • डीवीसी ने गृह मंत्रालय, भारत सरकार से कोलकाता में अवस्थित विभिन्न सरकारी उपक्रमों के मध्य राजभाषा नीतियों के निष्पादन में अपने बेहतर कार्यप्रदर्शन के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया।
  • डीवीसी ने विद्युत राज्यमंत्री, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार से राजभाषा में उत्कृष्ट कार्यनिष्पादन बाबत “एनटीपीसी राजभाषा शील्ड” (तृतीय पुरस्कार) भी प्राप्त किया।

 

सतर्कता पहल

डीवीसी ने विशेषरूप से “प्रतिभागितात्मक सतर्कता”  को ध्यान में रखते हुए वस्तुनिष्ठता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर विशेष बल दिया। डीवीसी प्रबंधन ने पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता को वर्धित करने के लिए विद्यमान पद्धतियों में विभिन्न तरह के परिवर्तन किये।

मानव संसाधन विकास

  • डीवीसी में प्रथम बार गुप्त मतदानों के माध्यम से “अनुशासन संहिता, 1954” के अनुसार ट्रेड यूनियनों को मान्यता प्रदान की गयी।
  • पेंशनधारियों और उनके पति/पत्नी को आवृत्त करते हुए एक ग्रुप मेडिक्लेम बीमा योजना प्रवर्तित की गयी है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 17,000 लोग आवृत्त हैं।
  • डीवीसी ने डीवीसी कर्मचारियों के बच्चों हेतु उज्ज्वल भविष्य के प्रति सभी परियोजनाओं में कैरियर काउंसिलिंग वर्कशॉप संचालित करने की पहल की शुरुआत भी की है। वर्ष 2013-14 में ऐसी कुल 5 कार्यशालाएँ मैथन, पंचेत, बोकारो ताविके, चंद्रपुरा ताविके तथा दुर्गापुर ताविके में आयोजित की गयी थीं।

निष्कर्ष

हमें आशा है, हम समाज के अंदर विश्वास वर्धन एवं सही समस्याओं का समाधान प्रदान करने में सतत् प्रयत्नशील रहेंगे।

हम भारत में एक मेगा पावर यूटिलिटी के रूप में डीवीसी की अग्रणीयता सुनिश्चित करने के लिए बेहतर ओएण्डएम पद्धतियों के क्रियान्वयन पर सतत् बल दे रहे हैं तथा साथ ही साथ, पणधारियों के सहयोग से डीवीसी के प्रचालन क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को त्वरित करने के हमारे प्रयासों को भी जारी रखने के लिए सचेष्ट हैं।

चार्टर की समीक्षा :

यह चार्टर प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर आधारित संशोधनों,अगर आवश्यक हों, हेतु प्रत्येक वर्ष इस चार्टर की समीक्षा की जाएगी  ।