मानव संसाधन

डीवीसी में मानव संसाधन विभाग दलगत कार्य एवं कर्मचारी नियोजन पर विशेष ध्यान देते हुए कर्मचारियों की निरंतर प्रगति के लिए प्रयासरत है। मानव संसाधन में उत्तम पद्धतियों को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की योजनाबद्ध प्रगति एवं विकास हेतु कई नीतियों एवं पहलों की शुरुआत की गयी  है ।

मानव संसाधन विभाग की मुख्य नीतियों/कार्यों का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है ।

डीवीसी में प्रशिक्षण मुख्यतः डीवीसी प्रशिक्षण नीति द्वारा परिचालित होता है जो वर्ष 2012 में आरम्भ किया गया था। चंद्रपुरा, बोकारो, झारखण्ड में डीवीसी की एक प्रमुख अंतगृह प्रशिक्षण सुविधा है जो पूरे वर्ष भर तकनीकी एवं व्यवहारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित करती है।

डीवीसी की एमटीपीएस, बाँकुड़ा, पश्चिम बंगाल में विद्युत संयंत्र अनुरूपक प्रशिक्षण केन्द्र भी है जो अपने कर्मचारियों को अनुरूपक प्रशिक्षण प्रदान करती है। डीवीसी समय-समय पर   अन्य प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों अर्थात पीएमआई – नोएडा, एएससीआई, ईएससीआई, आईआईएमसी, आईसीडब्ल्यूएआई,  एटीआई, एसपीसी, आदि की भी प्रशिक्षण हेतु मदद  लेती है।

डीवीसी प्रशिक्षण नीति की मुख्य विशेषताएँ:

(क) कार्यान्वयन एक चार चरणों वाला प्रक्रिया है-

  1. प्रशिक्षण आवश्यकता पहचान
  2. प्रशिक्षण कैलेण्डर तैयार करना
  3. प्रक्रिया मालिकों यथा प्रशिक्षण प्रधान एवं प्रशिक्षण समन्वयक द्वारा प्रस्तुति
  4. मूल्यांकन।

(ख) जीईटी/एमटी एवं उनके जैसों के लिए प्रवेशन  प्रशिक्षण कार्यक्रम :-

 

  1. सभी नव-नियुक्त कर्मियों के लिए न्यूनतम 5 दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आंतरिक संकाय सदस्यों द्वारा संचालित किये जाते हैं ।
  2. जीईटी के लिए विद्युत संयंत्र परिचयात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम (12 सप्ताहों का कार्यक्रम)
  3. एमटी/लेखा अधिकारियों आदि जैसे गैर-इंजीनियरों के लिए पाँच (5) दिवसीय तकनीकी कार्यक्रम।
  4. आंतरिक संकाय सदस्यों हेतु प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष संचालित किये जाते हैं ।

 

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यह नीति कनिष्ठ / मध्यम स्तर के कार्यपालकों में दलगत कार्य, सृजनात्मकता आदि जैसे  सामान्य प्रबंधन दक्षताओं को विकसित करने  के लिए बनायी गयी है। यह प्रतियोगिता सभी कार्यपालकों के लिए तथा  एक वार्षिक आधार पर संचालित होगी। इसकी विषय-वस्तु व्यापार प्रबंधन से संबंधित होगी तथा निगम की सभी परियोजनाओं/  इकाइयों/ कार्यालयों में प्रविष्टि आमंत्रण परिपत्र के माध्यम अधिसूचित की जाएगी।

यह प्रतियोगिता एक तीन-स्तरीय संरचना होगी, प्रारम्भिक मूल्यांकन इकाई के अंदर ही होगा, उसके बाद अंतर-इकाई मूल्यांकन होगा । प्रत्येक इकाई  के विजेता कॉरपोरेट स्तर पर अन्तिम राउन्ड की प्रतियोगिता में भाग लेंगे । प्रत्येक दल को प्रतियोगिता की विषय-वस्तु पर लिखित एवं मौखिक  प्रस्तुतीकरण पेश करना आवश्यक होगा। निगम द्वारा नियुक्त निर्णायक मंडली इसका मूल्यांकन करेगी।

यह नीति सर्वोत्तम संभाव्य तरीका से कर्मचारियों/आंतरिक ग्राहकों के प्रश्नों/ मुद्दों को सुलझाने तथा विभिन्न निगम नीतियों से उन्हें अवगत कराने के लिए तैयार की गयी है । मा.सं. एम्बेसडर कर्मचारियों के मनोभाव को समझने तथा उनके विशेष विभाग में प्रभावित रूप से सभी मा.सं. नीतियों, प्रक्रियाओं, पद्धतियों, प्रणाली के  क्रियान्वयन में सक्षम है । मा.सं. एम्बेसडर को सौपे गये विभागों के मा.सं. संबंधित सभी प्रश्नों / मुद्दों को  सर्वोत्तम संभाव्य तरीकों से सुलझाने का दायित्व है। वह पारस्परिक बात-व्यवहार पर आधारित एक समेकित मासिक रिपोर्ट तैयार करेगा तथा कार्यपालक निदेशक (मा.सं.) को उनके अवलोकनार्थ प्रस्तुत करेगा। विभागाध्यक्षों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर कार्यपालक निदेशक (मा.सं.) द्वारा प्रत्येक उत्तरवर्ती माह के 7वें दिन तक एक  ”माह का मा.सं. एम्बेसडर ” का चयन किया जाता है । सबसे ज्यादा ”माह का मा.सं. एम्बेसडर” जीतने वाले व्यक्ति को  ”वर्ष का मा.सं. एम्बेसडर ” के रूप में घोषित किया जाता है ।

यह नीति नए युवा कर्मचारियों को नए परिवेश के अनुकूल बनाने के लिए तैयार की गयी है। हितकामी प्रशिक्षुओं को आवश्यकतानुसार सलाह एवं दिशा-निर्देश देते हैं। हितकामी तथा पर्यवेक्षकों से प्रतिक्रिया प्राप्त कर  प्रशिक्षु अपने खुद के व्यक्तिगत विकास को उन्नत कर सकता है । यह नव नियुक्तों (जीईटी, एमटी, पार्श्व नियुक्त) के लिए प्रयोज्य होगा । हितकामी-प्रशिक्षुओं को  एक आइस-ब्रेकिंग सत्र – “मेंटरशिप शिखर सम्मेलन” में परिचित कराया जाता है। परामर्शी बैठक महीने में कम से कम एक बार आयोजित की जाती है एवं पत्रों व ई-मेलों के माध्यम नियमित संचार किया जाता है। सर्वश्रेष्ठ परामर्शी पुरस्कार  ”द्रोणाचार्य पुरस्कार” योग्य हितकामी को दिया जाता है।

इसमें वह कार्य सम्मिलित है जो यह सुनिश्चित करता है कि लक्ष्यों को प्रभावी एवं कुशलतापूर्वक लगातार पूरा किया जा रहा है। एक कर्मचारी के कार्य प्रदर्शन का प्रबंधन करना, संगठन के परिचालन एवं नीतिगत लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होता है। सभी कर्मचारियों हेतु कार्य प्रदर्शन का मूल्यांकन वार्षिक रूप में किया जाता है। मूल्यांकन प्रणाली में हाल ही में किए गए सुधार के कारण संपूर्ण प्रक्रिया वस्तुनिष्ठ हो गयी है जिससे यह रेटर और रेटी दोनों के लिए और ज्यादा स्पष्ट हो गया है।

डीवीसी कर्मचारियों को विगत महीनों में संचालित विभिन्न क्रियाकलापों की जानकारी प्रदान करने के लिए मासं विभाग द्वारा एक मासिक/त्रैमासिक ई मैगजीन की शुरुआत की गयी है । देखने के लिए क्लिक करें

पुरस्कार व पहचान योजना निम्नलिखित दो संवर्गों में शुरू की गयी है ।

  1. डीवीसी के विभिन्न संयंत्रों/परियोजनाओं/अवस्थानों हेतु उत्कृष्ट कर्मचारी ।
  2. असाधारण शैक्षिक कार्यप्रदर्शन हेतु डीवीसी कर्मचारियों के बच्चे

ये पुरस्कार प्रति वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर दिये जाते हैं ।

डाउनलोड करें स्वतंत्रता दिवस पुरस्कार योजना

पचास वर्ष के ऊपर के कर्मचारियों और उनके पति/पत्नी हेतु प्रतिपूर्ति आधार पर एक वार्षिक स्वास्थ्य चेक-अप योजना उपलब्ध है जो अस्पतालों के साथ टाई-अप है ।

संगठन की सेवाओं और प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने बाबत बहुमूल्य विचारों को संग्रहित करने के एक उद्देश्य के तहत मार्च और सितम्बर के महीनों में प्रत्येक वर्ष कर्मचारियों हेतु एक ओएफएसएस उपलब्ध कराया गया है। सभी संयंत्रों में सुझाव-पेटिकाएँ भी रखी जाती हैं ।

खुला मंच सुझाव

एक निश्चित वार्षिक राशि तक एक ग्रुप मेडिक्लेम स्कीम चलायी गयी है जिसमें पेंशनधारी आवृति है ।

जीएमआईपी एनरोलमेंट फॉर्म डाउनलोड