बाँध पुनर्वासन तथा समुन्नयन परियोजना (डीआरआईपी)

बाँधों ने कृषि और ग्रामीण उन्नति तथा विकास में एक अहम भूमिका निभायी है । भोजन सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कृषिगत तथा ग्रामीण विकास लक्ष्यों को संवर्धित करने के लिए सिंचित कृषिगत तथा पन बिजली विकास भारत सरकार की कार्य योजना को बल प्रदान करता है । जैसा कि दामोदर घाटी क्षेत्र में वृष्टिपात अधिकतर एक चार मासी मानसून मौसम में बंधा है, एक सुरक्षित पद्धति में जल का अधिकतम भंडारण महत्वपूर्ण है । वर्तमान परिदृश्य में नयी जलागार क्षमता का सृजन एक चुनौती भरा कार्य है । पहले सृजित जलागारों का अनुरक्षण जल संसाधनों के इष्टतम प्रबंधन हेतु बड़ा महत्व रखता है । इस प्रकार उन्हें सही दशा में रखना आवश्यक है । समय के साथ-साथ, बाँधों में संरचनात्मक खराबा आ रही है उसे ठीक करना जरूरी है। बाँध पुनर्वासन तथा संवर्धन परियोजना (डीआरआईपी) कार्यक्रम के अधीन विश्व बैंक निधियन सहित केन्द्रीय जल आयोग के तत्वावधान में ऐसे बाँधों के पुनर्वासन हेतु पहल किये जा रहे हैं जो 25 वर्षों से अधिक पुराने हैं । डीवीसी ने इस योजना के अधीन कोनार, मैथन और पंचेत बाँधों को शामिल करने के लिए सीडब्ल्यूसी से अनुरोध किया है । कोनार डैम को इस योजना के अधीन पहले ही शामिल किया जा चुका है तथा मैथन व पंचेत बाँधों के संबंध में प्रस्ताव सीडब्ल्यूसी तथा विश्व बैंक के पास विचाराधीन है ।