जलागार व बराज

डीवीसी चार बांधों – नदी बराकर पर तिलैया व मैथन, नदी दामोदर पर पंचेत तथा नदी कोनार पर कोनार के नेटवर्क से सुसंपन्न है । इसके अलावा, जल प्रबंधन की कुल प्रणाली के एक अंश स्वरूप बचे दुर्गापुर बराज तथा नहर नेटवर्क 1964 में पश्चिम बंगाल सरकार को सौंप दिया गया था । साथ ही, बीटीपीएस के कूलिंग टावर के लिए बोकारो बराज का व्यवहार किया जाता है ।

 

  • वर्तमान परिदृश्य में व्यवहार योग्य बाढ़ आरक्षण क्षमता 971 एमसीएम है जो चार जलागारों में उपलब्ध है । मैथन और पंचेत जलागारों में संयुक्त बाढ़ भंडारण 3684 क्यूमेक क्षमता संपन्न निम्न दामोदर चैनलों को सुरक्षित रखने में 14169 क्यूमेक की उच्च बाढ़ को सुरक्षित रूप में संयमित कर सकता है ।
  • चार जलागारों में यथा उपलब्ध 926 एमसीएम विद्यमान संरक्षण भंडारण से पश्चिम बंगाल व झारखंड में औद्योगिक, म्यूनिसिपल तथा घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 309 एमजीडी जल की आपूर्ति की जाती है ।
  • पश्चिम बंगाल में खरीफ तथा रबी सिंचाई संभाव्यता क्रम से 3,93,763 तथा 22,258 हेक्टेयर है ।
  • 16,882 रोक बांधों तथा लघु जलागारों यथा जमुनिया, गोण्डा और चारवा के द्वारा झारखंड में 67,542 हेक्टेयर की खरीफ सिंचाई संभाव्यता सृजित की गयी है ।
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